किचन का वास्तु कैसा होगा चाहिए?

किचन का सही वास्तु: समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए आवश्यक नियम आचार्य रोहित पाण्डेय के अनुसार, किचन का वास्तु घर की समृद्धि और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। यदि किचन सही दिशा और नियमों के अनुसार बनाया जाए, तो यह न केवल घर के सदस्यों के स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करता है। आइए जानते हैं कि एक आदर्श किचन का वास्तु कैसा होना चाहिए। 1. किचन की सही दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, किचन को आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) में बनाना सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा अग्नि तत्व से संबंधित है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। यदि यह संभव न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा में किचन बनाया जा सकता है। 2. गैस चूल्हे की स्थिति गैस चूल्हा हमेशा पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए। खाना बनाते समय गृहिणी का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। चूल्हे और पानी के स्रोत (सिंक) के बीच उचित दूरी होनी चाहिए क्योंकि अग्नि और जल का मेल वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है। 3. सिंक और पानी का स्थान किचन में पानी से संबंधित सभी वस्तुएं (सिंक, वाटर फिल्टर, पानी की टंकी) उत्तर-पूर्व दिशा में होनी चाहिए। पानी और अग्नि के तत्वों को एक-दूसरे से दूर रखना चाहिए, ताकि घर में तनाव और धन की हानि न हो। 4. भंडारण और अलमारी की स्थिति अनाज, मसाले, दालें और बर्तन रखने के लिए पश्चिम या दक्षिण दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इस दिशा में अलमारी या कैबिनेट बनवाने से घर में धन की वृद्धि होती है और भंडार भरा रहता है। 5. किचन के रंगों का चयन हल्के और सकारात्मक रंग जैसे पीला, नारंगी, हल्का लाल या हल्का हरा किचन के लिए शुभ माने जाते हैं। गहरे रंगों (जैसे काला और भूरा) से बचना चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं। 6. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का स्थान माइक्रोवेव, मिक्सर, टोस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखने चाहिए। फ्रिज को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना सबसे अच्छा होता है, जिससे स्थिरता और समृद्धि बनी रहती है। 7. वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी किचन में उचित वेंटिलेशन और खिड़कियों की व्यवस्था होनी चाहिए। पूर्व या उत्तर दिशा में खिड़कियां रखना शुभ होता है, जिससे सूर्य की किरणें घर में सकारात्मक ऊर्जा भरती हैं। किचन में एक एग्जॉस्ट फैन या चिमनी अवश्य होनी चाहिए ताकि नकारात्मक ऊर्जा और धुआं बाहर निकल सके। 8. पूजा स्थल और किचन किचन के अंदर मंदिर या पूजा स्थल नहीं होना चाहिए। यदि आवश्यक हो, तो उत्तर-पूर्व दिशा में एक छोटा सा स्थान भगवान के लिए रखा जा सकता है। 9. किचन में सफाई और व्यवस्थितता किचन हमेशा साफ और सुव्यवस्थित होना चाहिए। जूठे बर्तन रात में नहीं छोड़ने चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। किचन में टूटे-फूटे बर्तन, खराब इलेक्ट्रॉनिक्स या अनुपयोगी वस्तुएं नहीं होनी चाहिए 10. किचन में समृद्धि बढ़ाने के उपाय किचन में रोज़ सुबह घी का दीपक जलाएं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। अन्न भंडारण स्थान में तुलसी के पत्ते या गंगाजल रखने से वास्तु दोष समाप्त होता है। चावल, गेहूं और दालों को साफ और व्यवस्थित रखें ताकि घर में कभी धन और भोजन की कमी न हो। निष्कर्ष आचार्य रोहित पाण्डेय के अनुसार, यदि किचन का वास्तु सही हो, तो घर में धन, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है। छोटे-छोटे बदलाव करके हम अपने जीवन में सकारात्मकता ला सकते हैं। सही दिशा, रंग, वस्तुओं की व्यवस्था और सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यदि किचन वास्तु दोष से प्रभावित है, तो उपरोक्त उपायों को अपनाकर इसे ठीक किया जा सकता है। अगर आप भी अपने घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाना चाहते हैं, तो वास्तु शास्त्र के इन नियमों का पालन करें।