वैदिक ज्योतिष में शनि को सेवा और कर्म का कारक कहा गया है और यह नौकरी में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है। ठीक इसी प्रकार दूसरे ग्रह भी अन्य विषयों के कारक हैं-
सूर्य: ज्योतिष में सूर्य को सरकारी नौकरी, उच्च पद, मान-सम्मान, आत्मा, पूर्वज, नेत्र पीड़ा, पिता, राजनीति, चिकित्सा विज्ञान और आत्म विश्वास का कारक माना गया है।
चंद्रमा: चंद्रमा को मन, माँ, यात्रा, जल, मनोविकार और धन आदि का कारक माना गया है।
मंगल: वैदिक ज्योतिष में मंगल को साहस, पराक्रम, ऊर्जा, क्रोध, शक्ति, विवाद, युद्ध,शत्रु और भूमि आदि का कारक होता है।
बुध: भारतीय ज्योतिष में बुध को बुद्धिमता, तर्कशक्ति, गणित, त्वचा, चेतना, व्यापार, सांख्यिकी, मामा और मित्र आदि का कारक कहा गया है।
गुरु: वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, दर्शन, विवेक, धर्म, गुरु, आध्यात्मिकता, परोपकारी कार्य और पुत्र का कारक माना जाता है।
शुक्र: शुक्र ग्रह जीवनसाथी, कला, प्रेम, सौंदर्य, भौतिक सुख, वाहन, संगीत और शयन सुख का कारक होता है।
शनि: न्याय प्रिय शनि देव को आयु, नौकरी, दुःख, गरीबी, आकस्मिक संकट, विदेशी भाषा, लोहा और तेल समेत विभिन्न वस्तुओं का कारक होता है।
राहू: राहू कठोर वाणी, जुआ, भ्रमित बुद्धि, जहर, चोरी, दुष्टता, त्वचा की बीमारियाँ और धार्मिक यात्राएँ आदि का कारक कहा गया है।
केतु: केतु को तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, दर्द, बुखार, घाव, शत्रुओं को नुकसान पहुंचाना और मोक्ष का कारक माना गया है।