वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में सीढ़ियों की सही दिशा और बनावट
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में सीढ़ियों की सही दिशा और बनावट
वास्तु शास्त्र में घर के हर हिस्से का एक विशेष महत्व होता है, और सीढ़ियों की दिशा और बनावट भी घर की ऊर्जा को प्रभावित करती है। सही दिशा और संरचना के अनुसार बनाई गई सीढ़ियाँ घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मकता लाने में सहायक होती हैं। यदि सीढ़ियाँ गलत दिशा में बनाई जाती हैं, तो यह घर के सदस्यों के लिए आर्थिक और मानसिक समस्याएँ उत्पन्न कर सकती हैं।
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1. सीढ़ियों की सही दिशा (Best Direction for Stairs as per Vastu)
(क) कौन-सी दिशा में बनानी चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, सीढ़ियों का निर्माण इन दिशाओं में करना सबसे शुभ माना जाता है:
1. दक्षिण (South) दिशा – यह दिशा स्थायित्व और मजबूती का प्रतीक होती है।
2. पश्चिम (West) दिशा – यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि बनाए रखती है।
(ख) किन दिशाओं में सीढ़ियाँ नहीं होनी चाहिए?
1. उत्तर (North) दिशा – इस दिशा में सीढ़ियाँ बनाने से आर्थिक नुकसान हो सकता है।
2. पूर्व (East) दिशा – यहाँ सीढ़ियाँ बनाने से परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
3. उत्तर-पूर्व (North-East) कोना – इसे ईशान कोण कहा जाता है, जो बहुत ही पवित्र स्थान होता है। यहाँ सीढ़ियाँ बनाना वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है और परिवार की आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।
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2. सीढ़ियों की सही बनावट (Ideal Staircase Design as per Vastu)
सीढ़ियों की दिशा के साथ-साथ उनकी बनावट और डिज़ाइन भी वास्तु शास्त्र में बहुत मायने रखती है। नीचे कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम दिए गए हैं:
(क) सीढ़ियों की चढ़ाई की दिशा:
सीढ़ियाँ हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर चढ़नी चाहिए और उतरते समय उत्तर या पूर्व की ओर उतरनी चाहिए।
सीढ़ियों की शुरुआत उत्तर से दक्षिण या पूर्व से पश्चिम की ओर होनी चाहिए।
(ख) सीढ़ियों की संख्या (Number of Steps):
सीढ़ियों की कुल संख्या विषम (Odd) होनी चाहिए, जैसे 9, 11, 15, 21 आदि।
सीढ़ियों की संख्या को 3 से विभाजित करने पर शेषफल 1 या 2 आना चाहिए। जैसे – 10 (गलत), 11 (सही), 12 (गलत), 13 (सही)।
(ग) सीढ़ियों के नीचे का स्थान (Space Under Stairs):
सीढ़ियों के नीचे कोई पूजा स्थान, रसोई या पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए।
इस स्थान को खाली रखना या स्टोरेज के लिए उपयोग करना सही होता है।
(घ) सीढ़ियों का आकार (Shape of Staircase):
सीढ़ियों का आकार गोलाकार (Spiral) नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह मानसिक अस्थिरता पैदा कर सकता है।
सीढ़ियाँ हमेशा चौकोर या आयताकार होनी चाहिए।
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3. बाहरी और आंतरिक सीढ़ियों के लिए वास्तु टिप्स (Vastu Tips for Internal & External Staircase)
(क) बाहरी सीढ़ियाँ (External Staircase)
मुख्य द्वार के ठीक सामने सीढ़ियाँ नहीं होनी चाहिए।
बाहरी सीढ़ियों को हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए।
सीढ़ियों का रंग हल्का होना चाहिए, जैसे सफेद, हल्का पीला या हल्का गुलाबी।
(ख) आंतरिक सीढ़ियाँ (Internal Staircase)
घर के केंद्र (Brahmasthan) में सीढ़ियाँ बनाने से बचना चाहिए।
सीढ़ियाँ घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा (South-West) में होनी चाहिए।
घर की मुख्य दीवार से लगी हुई सीढ़ियाँ शुभ मानी जाती हैं।
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4. वास्तु दोष निवारण (Remedies for Staircase Vastu Dosha)
अगर घर में पहले से ही वास्तु दोष वाली सीढ़ियाँ बनी हुई हैं, तो कुछ उपाय अपनाकर इन दोषों को कम किया जा सकता है:
1. सीढ़ियों के नीचे रोशनी (Lighting Under Stairs): सीढ़ियों के नीचे हल्की रोशनी रखने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
2. ऊर्जा संतुलन के लिए पौधे (Plants for Energy Balance): सीढ़ियों के पास सकारात्मक ऊर्जा के लिए तुलसी या मनी प्लांट जैसे पौधे रख सकते हैं।
3. मोर पंख या वास्तु यंत्र (Vastu Remedies): सीढ़ियों के पास मोर पंख या वास्तु यंत्र लगाने से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
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निष्कर्ष (Conclusion)
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की सीढ़ियों की सही दिशा और बनावट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दक्षिण या पश्चिम दिशा में बनाई गई सीढ़ियाँ शुभ मानी जाती हैं, जबकि उत्तर-पूर्व दिशा में सीढ़ियाँ बनाना अशुभ होता है। इसके अलावा, सीढ़ियों की संख्या, आकार, और नीचे की जगह का सही उपयोग करना भी जरूरी है। यदि घर में पहले से ही वास्तु दोष है, तो वास्तु उपायों से उसे ठीक किया जा सकता है। सही दिशा और बनावट के अनुसार बनी सीढ़ियाँ घर में समृद्धि, शांति और सकारात्मकता लाने में मदद करती हैं।
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क्या आपके घर में सीढ़ियों की दिशा सही है? अगर नहीं, तो इन वास्तु टिप्स को अपनाकर अपने घर को सकारात्मक ऊर्जा से भरें!